क्या आप सही तरीके से अपने बच्चो की परवरिश कर रहे है? कही आप लाड़ – प्यार मे बच्चो को बिगाड तो नही रहे ?
क्या आप के बच्चे भी ज़िद्दी और डिमांडीग होते जा रहे हैं ?

आजकल के बच्चों की बढ़ती हुई जिद और डिमांड पेरेंट्स की सबसे बड़ी परेशानी की वजह है | बच्चों की बढती मांग को लेकर पेरेंट्स काफी परेशान रहने लगे हैं | वे मानते हैं कि बच्चे जब तक छोटे थे तब तक उनकी डिमांड पूरी करना आसान था लेकिन अब बच्चों की जिद इतनी बढ़ गई है कि पेरेंट्स को ब्लैकमेल करने लगे हैं | इमोशनल अत्याचार कर के यहां तक कि खुद को तकलीफ पहुंचाने की धमकी देकर या घर से भाग जाने की बात कह कर अपनी जिद्द पूरी करवाते हैं |
60% प्रतिशत परिवार बच्चों की जिद के आगे घुटने टेक देते हैं |
हालहीं में हुई कुछ घटनाएं बच्चों की बढती डिमांड को एक गंभीर समस्या के रूप में उभारा है | कुछ दिनों पहले मैंने अखबार में पढ़ा था कि स्मार्टफोन की जिद की वजह से एक लड़की ने सुसाइड करने की कोशिश की | यहीं नहीं बच्चों को पेरेंट्स द्वारा डांटने से भी सुसाइड करने की कोशिश करते है | मोबाइल लैपटॉप बाइक जैसी महंगी वस्तुओ की डिमांड अक्सर बच्चे और पेरेंट्स के बीच तनाव और मनमुटाव आजाता है |और बच्चे मां बाप को एक विलन की तरह देखने लगते हैं |
कई उदाहरण तो ऐसे भी हैं जिसमे यदि पेरेंट्स डिमांड पूरी ना करे तो बच्चे गलत तरीकों का सहारा लेते हैं और गलत कामों में पड़ जाते हैं | अपने व्यवहार में नकारात्मक बदलाव ले आते हैं जैसे झूठ बोलना, बातें छुपाना, पेरेंट्स के साथ एग्रेसिव व्यवहार करना, घर की चीजे तोड़ना, खुद को नुकसान पहुंचाना, नींद की गोलियां खाने की बात करना, घर से बाहर अधिक समय बिताना, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग जैसे आदतें लगाना, डिमांड पूरी ना होने पर पढ़ाई छोड़ने की बात करना इत्यादि |
परंतु यह बात भी सच है कि बच्चों की डिमांड अचानक नहीं बढ़ती | शुरुआत में पेरेंट्स अपने बच्चों की हर जायज़ नाजायज़ डिमांड पूरी करते हैं और उन्हें लाड़ प्यार में बिगाड़ कर इतना जिद्दी बना देते हैं कि आगे चलकर बच्चे ना सुनना पसंद नहीं करते | विशेषज्ञों की माने तो बच्चों को जरूरत से ज्यादा लाड़ प्यार करना इसका मुख्य कारण है इसलिए जहां तक हो सके टीनएजर्स का ऐसा रवैया होने पर पेरेंट्स को उन्हें समझाना चाहिए | सोसाइटी की रिक्वायरमेंट और अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताना चाहिए | उनकी गलत बातो पर उन्हें डांटना चाहिए |

ऐसे में क्या करना चाहिए ?
1) शुरुआत से बच्चों पर कंट्रोल रखें |
2)अधिक लाड प्यार में उन्हें ना बिगाड़े |
3) मनी मैनेजमेंट सिखाएं |
4)चीजों की अहमियत बताएं |
5)उनके लिए क्या सही है और क्या गलत, उसकी जानकारी उन्हें दे |
6) उनके सामने उन बच्चों का उदाहरण रखें जो गरीबी और अभाव में जीते हैं फिर भी आगे रहते हैं |
7)उनकी किसी भी जिद या मांग को तुरंत पुरा ना करें |
8)उनमें ना सुनने की आदत डालें |
9)मेहनत और टाइम की वैल्यू समझाएं |
10)संस्कार और मोरल वैल्यूज के बारे में बताएं |
11)बच्चों को पॉकेट मनी जरूरत से ज्यादा ना दें |
12) बच्चों की खराब संगत एक महत्वपूर्ण कारण बन सकती है इसलिए उनके दोस्तों के बारे में पूरी जानकारी रखें |
13)जरूरत से ज्यादा महंगी चीजें ना दिलाएं |
14)अपनी आर्थिक स्थिति से बढ़कर कुछ भी ना करें |
15) ना ही कोई ऐसा कमिटमेंट करें जिसे आप पूरा ना कर सके|
आपकी परवरिश में कहीं ना कहीं कमी रहने पर आप इस प्रॉब्लम को फेस कर सकते हैं इसीलिए इन बातों का जरूर ध्यान रखें | बच्चों को लाड प्यार करना सही है परंतु बच्चों के प्यार में इमोशनल होकर उनकी जिद और इच्छाएं पूरी करना गलत है |