Bhartiy-Jeevan Shaili

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वर्तमान में भारत में  सभी स्तर पर ‘संक्रमण काल’ चल रहा है, पाश्चयात जीवन शैली ने  हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रवाह बना लिया है, परंतु हमारी सोच क्रिया कलाप अभी भी भारतीय ही हैं,जिसका द्वंद नित नई समस्या हमारे लिए खड़ी कर रही है।

हम प्राकृतिक नियम, समय बद्ध जीवन शैली, आहार-विहार में भारतीय हैं, परंतु देर रात तक जागना आधुनिक संसाधनों का उपयोग, जो शायद आज की आवश्यकता हो गई है, ने हमारे स्वास्थ्य एवं मन पर प्रतिकूल असर डाला है।

मेरे अनुसार यदि हम कुछ नियमों में समय के अनुसार बदलाव करें तो time management और मानसिक कष्ट से किसी हद्द तक निजात पा सकते हैं, जैसे-

  1. दोनों समय भरपूर भोजन की जगह छोटे छोटे खाने को जीवन में लाना चाहिए।
  2. नियम से सोने उठने को अपनी आवश्यकता के अनुसार समय बद्ध करना होगा, जिससे 6-8 घंटे की नींद मिल सके।
  3. व्यायाम को भी समय देने के लिए समय निश्चित करना चाहिए चाहे वह कोई भी समय हो, आवश्यक नहीं की सुबह ही व्यायाम किया जाए।
  4. परिवार में सभी सदस्य स्वावलंबी बनें ।
  5. अपनी दिनचर्या के हिसाब से क्या खाएं, कब खाएं और सोने का समय भी निश्चित करें, बिना नैसर्गिक नियमों को ध्यान दिये, जो समय की मांग है ।
  6. परंतु इन सब में अनुशासन(self discipline) बहुत आवश्यक है।

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