चॉकलेट डे (chocolate day)

दोस्तों, आज सुबह सुबह आदत के अनुसार कान में ईयर फोन लगा कर घूम रहा था,रेडियो FM 97.2 से आवाज आई, दोस्तों सुप्रभात,नमस्कार,सत श्री अकाल,अदाबार्ज,आज आपको मालूम है चॉकलेट डे है, उसकी भी बधाई, मन में सोचा, अरे न जाने क्या क्या डे मानते हैं लोग,हमने तो कभी भी बॉम्बे की मिठाई वाला, बुढ़िया के वाले को, याद ही नहीं किया जिसे खा कर हमें सारी दुनिया का सुख मिलता था,  एक लंबी सी लकड़ी में हरी,लाल,पीली रंग की रबर जैसे मिठाई लगाकर घंटी बजता हुआ निकलता था और सारे बच्चे उसके पास इकट्ठा हो जाते थे, कुछ खरीदने और कुछ ये देखने की आज वो उस मिठाई से क्या बनाएगा, वह रोज नई नई चीज बनाता कभी चिड़िया कभी फूल,बच्चे उसे लेकर इस प्रकार दौड़ते जैसे उन्हें पूरी कायनात मिल गई हो, कभी उसे चाटते कभी रुक जाते कि उसका स्वरूप न बिगड़ जाये,आज तो भाई ये सब uncivilized, unhygienic हो गया है, हम तो पेड़ काट कर modern civilization बना रहे हैं।खैर सोचा आज खोजा  जाए कि रोटी कब से बनना चालू हुई पता लगाते हैं, और अपन भी रोटी डे मनाएंगे,मिल गया तो अपन भी डब्बुजी जैसे रातों रात छा जाएंगे, शुरू किया घर के ही बड़े बुजुर्गों से, अरे ये क्या सबाल ले आया, जब से आदमी इस दुनिया में आया तभी से रोटी खा रहा है, फिर भी कुछ तो मालूम होगा जैसे चॉकलेट कि खोज 1920 में मैक्सिको के ओलेमेक्स शहर में हुई थी, इस प्रकार, अरे चल दिमाग मत खा, फिर सोचा दोस्तों से पूछते है, शायद किसी ने कहीं पढ़ा हो वो भी मज़ाक करने लगे यार तू तो VRS लेकर फ्री है हमारी जान क्यों खा रहा है, मैंने कहा नहीं यार में सही में पूछ रहा हूँ, क्योकि दुनिया में चॉकलेट डे,पिज्जा डे,रोज़ डे न जाने कौन कौनसे दिन मनाते हैं,हम भी अब रोटी डे, खीर डे, हलवा डे, मनाएंगे, कुछ मालूम नहीं यार। सोचा archeology survey वालों से पूछते हैं मेरे एक संबंधी हैं, फोन लगाया, तो कहने लगे खुदाई में यदि कहीं कुछ तथ्य मिले है तो उससे पता तो लगता है कि इस समय में लोग रोटी खाने लगे होंगे, परंतु इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि रोटी इसी काल में बनना प्रारम्भ हुई होगी,  उसके पहले भी हो सकती है, स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं कि ईसा से इतने बर्ष पहले रोटी बनने लगी थी, तो आप भी कुछ नहीं बता सकते, नहीं भाई। चलो अब अंतिम सहारा गूगलबाबा ही थे उनकी शरण में गए तो रोटी के इतिहास में रोटी के प्रकार तो मिले पर रोटी कि खोज कब कहाँ हुई कुछ नहीं मिला। थक हार के बैठ गए । क्या करें हिसाब किताब, लिखत पढ़त में हैं ही हम पीछे तभी तो ये विदेशी हमारी चीजों का ब्रांड अपने नाम करते रहते हैं और  हम बस चिल्लाते रहते हैं, हल्दी तो हमारे यहाँ बर्षों से खाने में,दबाई में उपयोग हो रही है आदि आदि………..

खैर, दोस्तों सपने तो सपने ही होते है कोई बात नहीं तारीख नहीं मिली तो क्या आज से अपन भी चैत्र माह कि प्रथमा को नए बर्ष के साथ रोटी डे भी मनाएंगे,खीर और हलवा के बारे में भी सोचते हैं। अरे हाँ भाई किसी को यदि वो बॉम्बे कि मिठाई वाला मिले तो बताना बचपन कि याद ताजा कर लेंगे।

rakesh choubey