जीवन शैली 3

जीवन एक विज्ञान की तरह है उसका उपयोग हमारे ऊपर निर्भर करता है,पिता की बढ़ती आयु से चिंतित बेटे ने कहा पापा! अब आप लोगों की उम्र बढ़ती जा रही है क्यों न हम अब एक जगह रहें तो ठीक रहेगा। आप को भी हमारा सहारा हो जाएगा और हमारे बच्चों को भी आप लोगों के साथ रह कर कुछ सीखने को मिलेगा। सही कहते हो बेटा, परंतु पूरी ज़िंदगी हम एक जीवन शैली में जीते आए हैं जो आज कल की जीवन शैली से मेल नहीं खाती, ऐसा नहीं दोनों में कोई विरोधाभास है सिर्फ अंतर इतना है कि, तुम या यूं कहूँ तुम्हारी पीढ़ी ने दुनिया के सिद्धांतों और परम्पराओं के साथ ताल मेल बैठा कर चलने की ठानी है और हमने सिर्फ अपनी परंपरा और  सिद्धांतों पर अपना जीवन जिया, हमारी लालसा दुनिया देखने की नहीं थी और हम अपने आप में संतुष्ट थे तब तक ये ठीक था, परंतु तुम्हें और तुम्हारी पीढ़ी को साधुवाद की उसने अपनी ताकत दिखाई और आज पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। हाँ बात हो रही थी तुम्हारे साथ रहने की उसका एक कारण हमारी जीवन शैली है जो तुमको और हमको हमेंशा तनाव में रखेगी,तुम्हारे खाने, सोने उठने ,के समय तुम्हारी नौकरी के अनुसार चलेंगे कभी तुम बाहर ही खाना खा के आओगे आदि आदि , हमारे घर पर रहने से तुम्हें हमारी चिंता होगी। आप आओ तो कुछ adjust करेंगे,मुझे ज्यादा चिंता आप लोगों के स्वास्थ्य की रहती है बीमारी में कैसे करेंगे, बेटा बीमार होने पर तुम भी क्या करोगे डॉक्टर की ही सलाह लोगे न? वो हम भी ले लेते है आज हम 21 वीं शताब्दी में है बेटा जहां सारी सुविधा मौजूद हैं, फोन पर गाड़ी आ जाती है, hospital की कमी नहीं। फिर भी यदि साथ रहते तो माँ को तो सुविधा हो जाती, ये सब जज़्बाती विचार है, आज गैस पर खाना बनता है,हमारा खाना सादा, बिना नमक मिर्च का और तुम्हारे दिन अभी अच्छा खाने के हैं इसलिए काम ही बढ़ेगा और  कपड़े के लिए वाशिंग मशीन है काम के लिए हेल्पर मिल जाते हैं।पर बच्चों को आप का साथ कैसे मिलेगा? वो तो संभव नहीं, क्योंकि  क्या तुम अपनी नौकरी छोड़ कर यहाँ आकर अपनी ज़िंदगी शुरू कर सकते हो,अपने बच्चों को अच्छे public school से निकाल कर यहाँ admission करा सकते हो नहीं न? और होना भी नहीं चाहिए यदि हमने तुम्हें पढ़ा लिखा कर आज इस मुकाम पर पहुंचाया है तो तुम्हें अपने बच्चों को कहीं ऊपर देखना चाहिए,ये इसलिए की दादा दादी नाना नानी तभी तो कुछ सिखा पाएंगे जब बच्चे उनके साथ रहें आज बच्चे स्कूल से आते हैं और उनका coaching का समय हो जाता है वहाँ से आते है तो hobby class, नींद में तो खाना खाते हैं और सो जाते है उनके पास समय ही नहीं है, इसलिए समय के अनुसार चलो कहीं यदि कोई परेशानी हो तो बताना जितनी हो सकेगी मदद करेंगे।पापा बच्चों के बीच आपका मन बहल जाएगा, हाँ वो तो है परंतु उसके लिए मैंने तुमसे कहा तो है जब भी समय मिले outing के लिए यहीं आ जाया करो हम वो सारी सुविधा यहीं उपलब्ध करेंगे और मजा लिया करेंगे और दीपावली और गर्मियों की छुट्टी तो तुम्हें यहाँ बितानी है तब हम अपने नौनिहालों से मिल कर खूब मस्ती करेंगे।

बहू बोली, पापा मैं आप बाप बेटे की बात सुन रही थी, यदि आप आज्ञा करें तो में कुछ अपने विचार रखूँ, हाँ बेटा स्वागत है बोलो, पापा ये सारी बात क्यों उठी आज समाज में संस्कृति और परंपरा की दुहाई देकर बच्चों को कहा जा रहा है कि नवयुवक अपनी ज़िम्मेदारी न तो समझ रहे हैं और न ही निभा रहे है, माँ बाप  अपने बच्चों को पढ़ा लिखा के इस लायक इसलिए बनाते हैं, की वे बुढ़ापे में उनका साथ देंगे परंतु आज बच्चे अपनी ही दुनिया में व्यस्त हैं उन्हें माँ बाप की चिंता कहाँ ।हाँ बेटा में भी सुनता हूँ , शायद यह एक दुष्प्रचार है, जिससे नवयुवक जज़्बात में आ कर अपनी उन्नति में उस परिवार को रोढ़ा मान ले जिसने हमेंशा उसकी उन्नति की ही दुआ की है, दूसरी बात हमारी खानदानी परंपरा, समझी न! जैसे किसानी,लोहारी,बढ़ई आदि भी कारण थे जिससे माँ बाप बेटे को घर से बाहर काम करने नहीं जाने देते थे। परंतु आज युग परिवर्तन है जो जितना चलेगा उतना पाएगा।पापा आपके विचार तो मैने सुने परंतु क्या आप हमारी जीवन शैली से संतुष्ट हैं? किसी हद्द तक यदि अपनी उन्नति अपने official काम के लिए यदि तुम अपनी दिनचर्या को इस प्रकार बदलते हो तो कोई बात नहीं, परंतु यदि social media का उपयोग रात जाग कर करते हो तो गलत है। और बच्चों के लिए, बेटा यदि society में image के लिए यह सब करते हो तो गलत है परंतु यदि बच्चे को आप समझते हो कि इसकी जरूरत है तो ठीक है।परंतु फिर भी जीवन कैसे जियो उसमें अनुशासन होना ही चाहिए।

राकेश चौबे