Sardiyon Mein Shaadee (Ek Rochak Kissa)

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शादी शब्द सुनते ही आंखों के सामने दुल्हन और दूल्हे की एक अनकही छवि दिखाई देने लगती है | शादी की सिर्फ बात चलने भर से लड़के-लड़कियों के मन में एक अजीब सी घबराहट या बेचैनी घर कर जाती है | हर माता पिता के मन में अपने बच्चों की शादी को लेकर बहुत से अरमान होते हैं |माता पिता अपनी बेटी के लिए सबसे अच्छा लड़का ढूंढने की होड़ में लग जाते हैं या फिर सबसे अच्छी बहू घर लाने के जिद में लग जाते हैं | हमारा दामाद ऐसा हो या हमारी बहू ऐसी हो इस तरह की बातें हर परिवार में सुनने को मिलती है | फिर कुछ भावुक बातें भी हर घर में सुनने को मिलती हैं जैसे बेटी तो पराया धन है , एक दिन दूसरे घर चली जाएगी या फिर पत्नी के आने के बाद बेटा तो जोरू का गुलाम हो जाएगा, मां बाप की नहीं सिर्फ पत्नी की सुनेगा | मैंने तो और भी कई बातें अनुभव की है जिसे सुनकर मैं बहुत हंसा करती थी | जैसे कुछ रिश्तेदार मम्मी पापा से कहा करते थे कुछ सिखाओ, अपनी बेटी को नहीं तो 4 दिन भी ना टिक पायेगी ससुराल में या फिर कोई कहता था यह तो बहुत तेज है | लड़की को थोड़ा कम बोलना चाहिए वरना ससुराल में सास कहेगी मां बाप ने कुछ नहीं सिखाया |
जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई शादी को लेकर मन में कुछ अरमान घर करने लगे| लड़कियां खुद की शादी में सबसे सुंदर दुल्हन लगने की होड़ में भारी-भारी गहने और अच्छी-अच्छी साड़ियां, लहंगा जुटाने में लग जाती हैं | आखिर उसे सबसे सुंदर और हटके जो लगना होता है | मैं भी कुछ इसी तरह अपनी शादी को लेकर उत्सुक थी जब घर में शादी की बात चली और रिश्ते आने शुरू हुए तभी मैंने कह दिया की शादी करूंगी तो सिर्फ सर्दियों के मौसम में क्योंकि गर्मियों में ना तो भारी कपड़े सहन होते हैं और ना ही मेकअप ठीक रहता है | गर्मी और धूप से पसीने में सब किए कराए पर पानी सा फिर जाता है और मुझे मेरी शादी में सबसे बेस्ट दिखना है | फिर क्या था, मेरी इस बात का पूरा परिवार मजाक बनाने लगे और हमेशा इस पर मेरी खिल्ली उडाने लगे | पर मैं जिद पर अड़ी रही क्योंकि मैंने देखे थे गर्मियों की शादी में दुल्हनों के हाल | मेरी खुद की सहेली जिसकी शादी अप्रैल में थी, वह गर्मी की वजह से ना तो लहंगा संभाल पा रही थी और ना ही गहने | पसीने से उसके मेकअप पर बहुत बुरा असर पड़ा था और इतने भारी गहने गर्मी में उसे काटों की तरह चुभ रहे थे| मेरे बार बार कहने पर मेरी सगाई के बाद पापा ने जनवरी महीने के मुहूर्त का सुझाव दिया |
मैं बहुत खुश थी कि चलो , कम से कम मेरी सहेली जैसा मेरा हाल नहीं होगा | शादी की खरीदारी शुरु हुई | फैन्सी साडीया, गहने, लहंगा, मेहंदी के डिज़ाइन, मेकअप इन सब चीजों को लेते समय मैं बहुत बारीकी से अपनी पसंद को ध्यान में रखकर ले रही थी परंतु यह सब लेते समय मेैं यह पूरी तरह भूल गई की शादी सर्दियों में है तो मुझे कम से कम ठंड से बचाव को ध्यान में रखते हुए कुछ लेना चाहिए | शादी वाले दिन खुद को दुल्हन के रूप में देखकर मै मन ही मन खुशी से
फुली नही समा रही थी | शादी तो दोपहर में थी और बहुत से लोग आसपास थे तो सर्दियां इतनी महसूस नहीं हुई पर जब शाम को रिसेप्शन खुले बगीचे में हुआ तब सर्दी के मौसम का एहसास हुआ| मैं और मेरे पति स्टेज पर बैठे हुए थे | ठंडी हवाएं चल रही थी | शाम अब रात का रूप ले रही थी |पतिदेव तो सूट पहने हुए थे तो उसमे उन्हे ठंड से इतनी परेशानी नहीं हो रही थी , पर मेरे लिए यह बहुत मुश्किल था | खूबसूरत और स्टाइलिश दिखने की चाह में मैं भूल गई कि जनवरी में बहुत ठंड पड़ती है तो मुझे ठंड को ध्यान में रखते हुए मेरा लहंगा लेना चाहिए | अब ना तो मैं शॉल ओढ सकती थी और ना ही स्वेटर पहन सकती थी | अब मै ठहरी दुल्हन, अगर ऐसा करती तो फोटो अच्छी नहीं आती | गिफ्ट और आशीर्वाद देने आ रहे बड़े बुजुर्गो और दोस्तों को देख कर मन में पछतावा सा होने लगा | सब लोग स्वेटर और शॉल ओढे मुझसे मिल रहे थे और मैं ठंड से कपकपा रही थी | हर थोड़ी देर बाद शॉल ओढ लिया करती और जैसे ही कोई मिलने आता तो शॉल हटाके फोटो खिंचवाने में लग जाती | यह काफी देर तक चलता रहा| आखिर स्टेज कार्यक्रम खत्म हुआ और अब लगभग 12 बजने ही वाले थे | कुछ खास रिश्तेदार और हम सब लोग खाना खाने की ओर बढ़े तब मैंने मेरी ननद और भाभियों से कह दिया अब मुझसे ठंड सहन नहीं होगी अब मैं शॉल ओढे ही रहूंगी | उन सबने भी मेरी परेशानी को समझा और हामी भर दी | फिर क्या था , सब साथ खाने बैठे और उसके बाद कि मेरी सारी फोटोस में ना तो मेरा लहंगा दिख रहा ना मेरी ज्वेलरी |
सब से आखिरी में विदाई का समय आया | अब मेरे परिवार वाले और मेरा भाई मेरे पास मुझे विदा करने आये | पापा मम्मी की आखें आंसुओ से डबडबा रही थी | तभी मेरा छोटा भाई मेरे पास आया और धीरे से बोला, “और करो ठंड में शादी ” और मेरी हंसी उड़ाने लगा और सब लोग ठहाके लगाकर हंस दिये | उस वक्त पछताने के अलावा मैं और कुछ नहीं कर सकती थी और अपनी गलती पर शर्मिंदा सा महसूस कर रही थी |